मेरे एक दोस्त ने कहा - क्या करोगे यार लिख कर ?
मैंने कहा - कुछ नहीं किसी को कुछ दिखाना थोड़े ही है । बस शौक है लिखने का |
वो बोला - ये कीड़ा है , इसे निकालो । कुछ नहीं बदलता लिखने से । कविता लिखने से तुम्हारी महबूबा चाँद जैसी हो जायेगी क्या ?
मैंने कहा - प्यार के बारे में नहीं लिखूंगा ।
वो बोला - देश की हालत बदल लोगे क्या राजनीति की बात करके ?
मैंने कहा - राजनीति की बात भी नहीं करूँगा ।
दोस्त - चुटकुले लिखोगे ? हज़ारों pages हैं facebook pe ।
मैं - यार तुम दोस्त हो या दुश्मन ?
उसने कहा - दोस्त हूँ, इसीलिए कह रहा हूँ । कुछ नहीं होगा छोड़ दो , क्या करोगे यार लिख कर ?
वो चला गया, मैं बैठा रहा । उसकी बातें सुनकर मेरी कलम भी मुझे बेबसी से देखने लगी । फिर उसने भी आँख बंद करते हुए कहा - छोड़ दो , क्या करोगे यार लिख कर ?
Saturday, October 31, 2015
क्या करोगे यार लिख कर
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